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शुक्रवार, 19 जून 2026

₹50 हजार देकर सॉल्वर से परीक्षा दिलवाई, बायोमेट्रिक जांच में पकड़ा गया युवक

₹50 हजार देकर सॉल्वर से परीक्षा दिलवाई, 

बायोमेट्रिक जांच में पकड़ा गया युवक


BSF Recruitment Fake Candidate Case: जबलपुर के युवक ने ₹50 हजार देकर सॉल्वर से BSF परीक्षा और मेडिकल टेस्ट दिलवाया। बेंगलुरु ट्रेनिंग सेंटर में बायोमेट्रिक जांच के दौरान फर्जीवाड़ा उजागर हुआ। पुलिस सॉल्वर गैंग की तलाश में जुटी है।

BSF Recruitment Fake Candidate: ₹50 हजार देकर सॉल्वर से परीक्षा दिलवाई, बायोमेट्रिक जांच में खुला बड़ा फर्जीवाड़ा

BSF Recruitment Solver Gang Exposed: देश की सुरक्षा से जुड़ी BSF Recruitment 2025-26 में एक चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। मध्यप्रदेश के जबलपुर निवासी एक युवक ने कथित तौर पर ₹50 हजार देकर सॉल्वर से BSF भर्ती परीक्षा और मेडिकल टेस्ट दिलवाया। इतना ही नहीं, वह चयनित होकर बेंगलुरु स्थित बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर में पहुंच गया और 12 दिनों तक ट्रेनिंग भी करता रहा। लेकिन अंतिम Biometric Verification के दौरान फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने पर पूरा मामला उजागर हो गया।

बायोमेट्रिक जांच में खुली साजिश

जानकारी के अनुसार, जबलपुर के रांझी स्थित मनमोहन नगर निवासी शिव सिंह का चयन एसएससी के माध्यम से BSF Constable GD Recruitment 2025 में हुआ था। नियुक्ति के बाद वह 9 मार्च 2026 को बेंगलुरु ट्रेनिंग सेंटर पहुंचा।

ट्रेनिंग शुरू होने के 12 दिन बाद दस्तावेजों के अंतिम सत्यापन और बायोमेट्रिक जांच के दौरान उसके फिंगरप्रिंट रिकॉर्ड से मेल नहीं खाए। अधिकारियों ने कई बार जांच की, लेकिन सिस्टम लगातार 100 प्रतिशत फिंगरप्रिंट मिसमैच दिखाता रहा।

फोटो मिलान में सामने आया फर्जी अभ्यर्थी

जांच अधिकारियों ने जब एसएससी आवेदन पत्र और ई-एडमिट कार्ड में लगी तस्वीरों का मिलान किया, तो बड़ा खुलासा हुआ। परीक्षा देने वाला व्यक्ति और ट्रेनिंग सेंटर में मौजूद युवक अलग-अलग पाए गए।

सख्ती से पूछताछ करने पर शिव सिंह ने स्वीकार किया कि उसने ₹50 हजार देकर एक अज्ञात सॉल्वर को अपनी जगह लिखित परीक्षा और मेडिकल टेस्ट में शामिल कराया था।

कैसे हुआ BSF भर्ती घोटाले का खुलासा?

  • अभ्यर्थी ने सॉल्वर की मदद से परीक्षा पास की।
  • मेडिकल टेस्ट भी दूसरे व्यक्ति ने दिया।
  • चयन के बाद युवक बीएसएफ ट्रेनिंग सेंटर पहुंच गया।
  • 12 दिन तक ट्रेनिंग लेने के बाद अंतिम बायोमेट्रिक सत्यापन हुआ।
  • फिंगरप्रिंट मिसमैच होने पर जांच शुरू हुई।
  • पूछताछ में पूरे फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ।

ग्वालियर से जुड़ा है पूरा मामला

जांच में सामने आया कि आरोपी की लिखित परीक्षा 19 फरवरी 2025 को ग्वालियर के बिजौली थाना क्षेत्र के एक परीक्षा केंद्र में आयोजित हुई थी। भर्ती प्रक्रिया के अन्य चरण भी वहीं संपन्न हुए थे। इसी कारण बेंगलुरु पुलिस ने जीरो एफआईआर दर्ज कर मामला ग्वालियर पुलिस को भेज दिया है।

सॉल्वर गैंग की तलाश में जुटी पुलिस

बीएसएफ और पुलिस अधिकारियों ने इस मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय माना है। पुलिस अब परीक्षा केंद्र से जुड़े कर्मचारियों, सॉल्वर और पूरे Solver Gang Network की पहचान करने में जुटी है।

अधिकारियों का कहना है कि यदि बायोमेट्रिक सत्यापन नहीं होता तो आरोपी ट्रेनिंग पूरी कर सुरक्षा बल में शामिल हो सकता था। जांच एजेंसियों को आशंका है कि इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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