असम में आधार कार्ड पर बड़ा फैसला
18 साल से ऊपर वालों के लिए नए आधार पर कड़ी रोक,
घुसपैठ रोकने को सरकार का सख्त कदम

गुवाहाटी। अवैध घुसपैठ और फर्जी पहचान पत्रों पर रोक लगाने के लिए असम सरकार ने बड़ा और सख्त फैसला लिया है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में निर्णय लिया गया है कि अब राज्य में 18 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को नया आधार कार्ड जारी करने की प्रक्रिया को कड़ा किया जाएगा। सरकार का मानना है कि कुछ विदेशी नागरिक और अवैध घुसपैठिए आधार कार्ड का उपयोग भारतीय नागरिक होने का दावा करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए कर रहे हैं। सरकार के अनुसार राज्य के कुछ जिलों में आधार पंजीकरण दर 100 प्रतिशत से भी अधिक होकर 103 प्रतिशत तक पहुंच गई है। चार जिलों में जारी आधार कार्डों की संख्या अनुमानित जनसंख्या से भी अधिक पाई गई, जिसके बाद पहचान सत्यापन प्रक्रिया को और सख्त बनाने का निर्णय लिया गया। अब ऐसे बनेगा नया आधार कार्ड नए नियमों के तहत 18 वर्ष से अधिक आयु का कोई भी व्यक्ति सीधे आधार केंद्र जाकर नया आधार कार्ड नहीं बनवा सकेगा। यदि किसी विशेष और दुर्लभ परिस्थिति में किसी वयस्क को आधार कार्ड की आवश्यकता होगी, तो संबंधित जिले के उपायुक्त (डीसी) को विस्तृत जांच के बाद राज्य सरकार को विशेष रिपोर्ट भेजनी होगी। राज्य सरकार की मंजूरी मिलने के बाद ही आधार कार्ड जारी किया जा सकेगा। चाय बागान श्रमिकों और अनुसूचित जनजातियों को राहत असम सरकार ने चाय बागान श्रमिकों, अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) समुदायों को फिलहाल इस नियम से छूट दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन समुदायों के कई पात्र नागरिकों के आधार कार्ड अभी भी नहीं बन पाए हैं। इसलिए इनके लिए 1 अप्रैल 2027 तक आधार पंजीकरण की विशेष सुविधा जारी रहेगी। सरकार का लक्ष्य है कि निर्धारित समय सीमा तक इन समुदायों के सभी पात्र लोगों के आधार कार्ड बन जाएं। इसके बाद 1 अप्रैल 2027 से यह नियम इन वर्गों के वयस्क नागरिकों पर भी लागू होगा। घुसपैठ और फर्जी दस्तावेजों पर रोक मुख्य उद्देश्य राज्य सरकार का कहना है कि यह कदम राष्ट्रीय सुरक्षा और जनसांख्यिकीय संतुलन बनाए रखने के लिए उठाया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत विश्व शर्मा ने बताया कि पिछले एक वर्ष में सीमा पार से आने वाले कई अवैध नागरिकों की पहचान कर कार्रवाई की गई है। सरकार पहले ही उन लोगों के आधार कार्ड जारी करने पर रोक लगा चुकी है जिन्होंने राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) के लिए आवेदन नहीं किया था। नए नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि केवल वैध भारतीय नागरिकों को ही सरकारी पहचान पत्र और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिले। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों के दुरुपयोग और अवैध घुसपैठ पर प्रभावी नियंत्रण लगाया जा सकेगा।
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