बैगान टोला में तीन साल से स्कूल भवन नहीं,
56 बच्चे परेशान
शहडोल जिले के बैगान टोला में शिक्षा व्यवस्था की तस्वीर चिंता बढ़ाने वाली है। पिछले तीन वर्षों से यहां के 56 बच्चे बिना स्थायी स्कूल भवन के पढ़ाई कर रहे हैं। गांव में प्राथमिक शाला का अपना भवन नहीं होने के कारण कक्षाएं किराए के छोटे मकान में संचालित की जा रही हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सरकार बेहतर शिक्षा के लिए बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन बैगान टोला जैसे इलाकों में बच्चों को अब भी मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला शहडोल जिले के जनपद पंचायत सोहागपुर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत पोंगरी के बैगान टोला का है। जानकारी के अनुसार, प्राथमिक शाला पहले खसरा क्रमांक 606 की भूमि पर संचालित होती थी।
भूमि विवाद न्यायालय तक पहुंचने के बाद प्रथम व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-01 शहडोल के आदेश के पालन में 20 जून 2023 को विद्यालय भवन खाली करना पड़ा। इसके बाद से स्कूल के लिए नया भवन उपलब्ध नहीं हो सका।
घटना की मुख्य बातें
विद्यालय भवन 20 जून 2023 को खाली कराया गया।
तीन साल से स्कूल किराए के मकान में चल रहा है।
कुल 56 विद्यार्थी यहां अध्ययनरत हैं।
कक्षाओं के लिए पर्याप्त स्थान उपलब्ध नहीं है।
बच्चों के बैठने की समुचित व्यवस्था नहीं है।
खेलकूद, स्वच्छ पेयजल और शौचालय जैसी सुविधाएं भी नहीं हैं।
शिक्षकों को भी सीमित संसाधनों में पढ़ाई करानी पड़ रही है, जिससे शिक्षण कार्य प्रभावित हो रहा है।
किस पर पड़ेगा असर?
इस स्थिति का सबसे बड़ा असर बैगान टोला के 56 विद्यार्थियों पर पड़ रहा है। छोटे कमरों में पढ़ाई होने से बच्चों का ध्यान केंद्रित नहीं हो पाता और उनकी सीखने की क्षमता प्रभावित हो रही है।
यदि जल्द स्थायी भवन नहीं बना, तो बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता पर दीर्घकालिक असर पड़ सकता है। ग्रामीण क्षेत्रों में पहले से मौजूद शैक्षणिक असमानता और बढ़ने की आशंका है।
महत्वपूर्ण जानकारी
ग्राम पंचायत पोंगरी ने 8 जून 2023 को आयोजित ग्राम सभा में नए स्कूल भवन निर्माण का प्रस्ताव पारित किया था। इसके बाद शासकीय भूमि खसरा क्रमांक 607 का चयन करने की प्रक्रिया शुरू की गई।
पटवारी प्रतिवेदन और मौका पंचनामा के आधार पर भूमि चिन्हित करने का प्रस्ताव भी तैयार किया गया, लेकिन अब तक निर्माण कार्य शुरू नहीं हो सका है।
पंचायत ने जिला कलेक्टर को पत्र भेजकर प्रशासनिक और वित्तीय स्वीकृति शीघ्र देने की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और सुविधायुक्त वातावरण में शिक्षा मिल सके।
निष्कर्ष
बैगान टोला का मामला ग्रामीण शिक्षा व्यवस्था की गंभीर चुनौतियों को सामने लाता है। तीन साल बीत जाने के बाद भी नया स्कूल भवन नहीं बन पाना प्रशासनिक उदासीनता का संकेत माना जा रहा है।
अब स्थानीय लोगों की उम्मीद जिला प्रशासन से है कि वह जल्द निर्णय लेकर भवन निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराएगा, ताकि गांव के बच्चों का भविष्य असुरक्षित न रहे।


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