देश की सबसे बड़ी जल सुरंग तैयार,
6 जिलों के खेतों तक पहुंचेगा नर्मदा जल
मध्य प्रदेश में जल संसाधनों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल हुई है। कटनी जिले के स्लीमनाबाद में देश की सबसे बड़ी जल सुरंग का निर्माण पूरा हो गया है। यह सुरंग महाकोशल क्षेत्र की नर्मदा नदी के जल को प्राकृतिक बहाव के माध्यम से विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
करीब 12 किलोमीटर लंबी इस सुरंग का उद्देश्य बिना पंप की सहायता से नर्मदा के पानी को सोन बेसिन से जोड़ना है। इससे प्रदेश के छह जिलों की बड़ी कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने की योजना है।
क्या है पूरा मामला?
बरगी व्यपवर्तन परियोजना के दाएं तट की मुख्य नहर के अंतर्गत बनाई गई यह सुरंग लगभग 15 वर्षों में तैयार हुई है। परियोजना को वर्ष 2008 में 799 करोड़ रुपये की लागत से स्वीकृति मिली थी। वर्ष 2011 में निर्माण कार्य शुरू हुआ और इसे 40 माह में पूरा करने का लक्ष्य था, लेकिन तकनीकी और भौगोलिक चुनौतियों के कारण कार्य लगातार प्रभावित होता रहा।
सुरंग निर्माण के दौरान मशीनों के कटर टूटने, अधिक जल प्रवाह, मिट्टी धंसने तथा रेलवे लाइन के नीचे से टनल निकालने की अनुमति मिलने में लंबा समय लगा। इन कारणों से परियोजना की लागत बढ़कर लगभग 1600 करोड़ रुपये पहुंच गई।
कार्यपालन यंत्री सहज श्रीवास्तव के अनुसार सलैया फाटक से खिरहनी गांव तक पहाड़ों के नीचे निर्मित यह देश की सबसे बड़ी जल सुरंग है। टनल का निर्माण पूरा होने के बाद मशीन को बाहर निकालने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
मुख्य तथ्य
- लंबाई : 12 किलोमीटर
- व्यास : 10.14 मीटर
- स्थान : स्लीमनाबाद, जिला कटनी
- परियोजना : बरगी व्यपवर्तन परियोजना
- प्रारंभिक स्वीकृति : वर्ष 2008
- निर्माण प्रारंभ : वर्ष 2011
- प्रारंभिक लागत : 799 करोड़ रुपये
- वर्तमान अनुमानित लागत : लगभग 1600 करोड़ रुपये
- लाभार्थी : छह जिले एवं 1450 गांव
- सिंचित क्षेत्र : लगभग 2.45 लाख हेक्टेयर
किन जिलों को मिलेगा लाभ?
परियोजना के तहत निम्न क्षेत्रों को सिंचाई सुविधा मिलने की योजना है—
- कटनी – 21,823 हेक्टेयर
- मैहर – 54,227 हेक्टेयर
- सतना – 1,04,970 हेक्टेयर
- पन्ना – 448 हेक्टेयर
- रीवा – 3,084 हेक्टेयर
- जबलपुर – लगभग 60,000 हेक्टेयर
कुल मिलाकर छह जिलों के 1450 गांव इस परियोजना से लाभान्वित होंगे। योजना के अनुसार अक्टूबर से नर्मदा का जल विंध्य क्षेत्र तक पहुंचाया जाएगा।
निर्माण के दौरान आईं चुनौतियां
सुरंग निर्माण आसान नहीं रहा। कई बार मशीनों के कटर क्षतिग्रस्त हुए। अधिक जल प्रवाह और मिट्टी धंसने जैसी समस्याएं सामने आईं। रेलवे लाइन के नीचे सुरंग निकालने की अनुमति मिलने में भी कई माह लगे।
वर्ष 2022 में मशीन का कटर सुधारने के दौरान बनाए गए सॉफ्ट के धंसने से नौ मजदूर दब गए थे, जिनमें दो मजदूरों की मृत्यु हो गई थी। परियोजना से जुड़े कई कर्मचारी और मजदूर इस उपलब्धि को देखने से पहले ही दुनिया छोड़ चुके हैं।
मुख्यमंत्री करेंगे निरीक्षण
परियोजना पूरी होने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के टनल का निरीक्षण करने का कार्यक्रम है। वे पड़वार रोड स्थित स्थल का भी दौरा करेंगे, जहां मशीन को बाहर निकालने का कार्य चल रहा है। इसके बाद स्लीमनाबाद तिराहा में आयोजित सभा को भी संबोधित करेंगे।
महत्वपूर्ण जानकारी
- नर्मदा का जल प्राकृतिक बहाव से पहुंचाया जाएगा।
- परियोजना में पंपिंग की आवश्यकता नहीं होगी।
- टनल महाकोशल और विंध्य क्षेत्रों को जल उपलब्ध कराने में सेतु का कार्य करेगी।
- अक्टूबर से जल आपूर्ति शुरू करने की योजना है।
निष्कर्ष
कटनी में तैयार हुई यह जल सुरंग मध्य प्रदेश की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं में शामिल है। लंबे समय तक चली निर्माण प्रक्रिया के बाद अब इससे छह जिलों के किसानों को लाभ मिलने की उम्मीद है। यदि योजना निर्धारित समय के अनुसार आगे बढ़ती है तो बड़ी कृषि भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी और नर्मदा जल का बेहतर उपयोग संभव होगा।
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